Monday, December 22, 2025

किसान,छात्र,छात्राये खेतों से निकलने को मजबूर,कलेक्टर पन्ना को देना होगा ध्यान

 किसान,छात्र,छात्राये खेतों से निकलने को मजबूर,कलेक्टर पन्ना को देना होगा ध्यान

 

वारिश में टूटी पुलिया अजयगढ़ से बरियारपुर

अमित सिंह पन्ना - मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में अजयगढ़ से बरियारपुर कुर्मियान को जोड़ने वाला पुल भारी बारिश और बाढ़ में टूट गया था।जो आज तक पुनः निर्मित नहीं हो पाया है। ग्रामीणो को आज भी इसके निर्माण का इंतजार है। पुल के निर्मित न होने है ग्राम गड़रपुर, बरियारपुर कुर्मीयान, सलैया, रानीपुर सहित कई अन्य मजरो के सैकड़ो ग्रामीणो को भारी परेशानी से गुजरना पड़ा रहा है। इन गाँव मे पहुँच के लिए टूटे हुए पुल के पास लगे खेतो से एक अस्थाई रास्ता बनाई गई थी जिसमे बड़े बड़े गड्ढे हो चुके है जिससे निकलने वाले ट्रैक्टर, स्कूल बस सहित अन्य दो पहिया व चार पहिया वाहन कभी भी दुर्घटना का शिकार हो सकते है। बरसात के मौसम मे जब पुल टूटा था तो निर्माण संस्था सहित अजयगढ़ के सभी अधिकारियो द्वारा जल्द से जल्द निर्माण कि बात कही थी पर समय गुजरते ही ये बात भी शायद उन्होंने भुला दी ऐसे मे विभिन्न ग्रामो के किसान छात्र छात्राएं ओर ग्रामीण खेतों से गुजरने को मजबूर है।यह पुल सिर्फ आवागमन नहीं,बल्कि हजारों किसानों की रोजी-रोटी का सहारा है।जनता के द्वारा प्रशासन से मांग करते हुए जल्द से जल्द पुल निर्माण शुरू कराने कि बात कही।कलेक्टर पन्ना को इस विषय मे तुरंत ध्यान देने की आवश्यकता है।

 

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किसानों के लिये मुसीबत ,खाद की किल्लत से त्रस्त किसान, बच्चे-महिलाएं भी घंटों लाइन में

किसानों के लिये मुसीबत खाद की किल्लत से त्रस्त किसान, बच्चे-महिलाएं भी घंटों लाइन में

दिन भर खाद के लिए मशक्कत, फिर भी खाली हाथ लौट रहे लोग

  खाद पाने को लेकर महिलाओं एवं पुरुषों की लंबी लाइन
      
अमित सिंह पन्ना-
जिले में इन दिनों खाद की भारी किल्लत किसानों के लिए बड़ी परेशानी बन गई है। रबी फसल की बुवाई के अहम समय में खाद न मिलने से किसान बेहद चिंतित हैं। हालात यह हैं कि खाद लेने के लिए सुबह से ही पन्ना विपणन कार्यालय और विक्रय केंद्रों पर लंबी कतारें लग रही हैं
, जिनमें पुरुषों के साथ-साथ महिलाएं और छोटे बच्चे भी शामिल हैं। कई किसान परिवार सुबह अंधेरे में ही घर से निकलकर खाद केंद्रों पर पहुंच रहे हैं, लेकिन दिन भर इंतजार के बाद भी खाद नसीब नहीं हो रही। कतार में खड़े-खड़े महिलाएं  नजर आ रही हैं, वहीं बुजुर्ग किसान भी मजबूरी में लाइन में खड़े हैं। किसानों का कहना है कि फसल का समय निकल रहा है, अगर समय पर खाद नहीं मिली तो उत्पादन पर सीधा असर पड़ेगा।कई किसानों ने आरोप लगाया कि सीमित मात्रा में खाद आने से पहले ही स्टॉक खत्म हो जाता है, और कुछ लोगों को बार-बार खाद मिल जाती है जबकि अधिकांश किसान वंचित रह जाते हैं। खाद न मिलने से किसानों में गहरा आक्रोश है। उनका कहना है कि सरकार द्वारा खाद उपलब्ध कराने के दावे ज़मीनी हकीकत से दूर नजर आ रहे हैं। किसानों ने प्रशासन से तत्काल खाद की पर्याप्त आपूर्ति और पारदर्शी वितरण व्यवस्था की मांग की है, ताकि उन्हें बार-बार लाइन में लगकर अपमान और परेशानी न झेलनी पड़े।

इनका कहना है, दो दिनों से मैं लाइन में लग रहा हु लेकिन खाद नही मिल रही है,दिन भर हो गया टोकन मिला लेकिन खाद अभी भी नही मिली,हमारी फसल प्रभावित हो रही है

रजनेश किसान युवा

इनका कहना है कि लगता है आज भी खाद नही मिलेगी,,भीड़ है लाइन में लगे प्रतिदिन का यही है हाल फसल का नुकसान हो रहा हैशासन अच्छी व्यवस्था करे,जिससे खाद तुरन्त मिल सके

भूरी बाई महिला किसान

 

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Sunday, December 21, 2025

अंधविश्वास की 'रोटी' और जहर का तड़का। पन्ना में एक ही परिवार के 5 लोग हुए फूड पॉइजनिंग का शिकार!

अंधविश्वास की 'रोटी' और जहर का तड़का

पन्ना में एक ही परिवार के 5 लोग हुए फूड पॉइजनिंग का शिकार!

सभी को जिला अस्पताल किया रेफर।

जिला अस्पताल में भर्ती पांचों लोग। 


अमित सिंह पन्ना -​ बुंदेलखंड के हिस्सों में शिक्षा की कमी कहे या स्वस्थ व्यवस्था पर लोगो का विश्वास ना करना या फिर यूं कहें अंधविश्वास की जड़ें समाज में इतनी गहरी हो चूँकि हैं, की फिर से एक मामले ने इस चर्चा को हवा दी है जिसकी यह खौफनाक तस्वीर सामने आई है मध्य प्रदेश के पन्ना से। यहाँ एक ही परिवार के पांच लोग मौत के मुँह में जाते-जाते बचे। ​मामला धरमपुर जमुनिया गांव का है, जहाँ रात के खाने में 'कुदवा की रोटी' और 'चने की भाजी' खाना एक परिवार को भारी पड़ गया। खाना खाते ही राजकुमार, हरिराम, रिंकी, अनामिका और छोटे आदिवासी को तेज उल्टियाँ और चक्कर आने लगे। लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि चीख-पुकार मचने के बाद परिजन उन्हें अस्पताल ले जाने के बजाय पूरी रात घर पर झाड़फूंक करवाते रहे। 

जब बिगड़ी हालात तो पहुचे स्वास्थ्य केंद्र

जब हालत नाजुक हो गई और झाड़फूंक काम नहीं आई, तब ग्रामीणों की मदद से उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गुन्नौर ले जाया गया। डॉक्टरों ने इसे गंभीर फूड पॉइजनिंग बताया है। प्राथमिक उपचार के बाद सभी को आज जिला अस्पताल पन्ना रेफर कर दिया गया है। फिलहाल डॉक्टर उनकी जान बचाने की जद्दोजहद में जुटे हैं। यह घटना सबक है कि बीमारी में दुआ और झाड़फूंक नहीं, बल्कि सही समय पर डॉक्टरी इलाज ही जान बचा सकता है।

 रात में कुदवा की रोटी ओर चना की भाजी खाई थी जिसके बाद तवियत बिगड़ गई आगा की कुछ बाहरी भीतरी हो गया है इस लिए खबर में ही पहले झाड़ फूक करवा ली जब तवियत सही नही हुई तो पहले गुन्नौर लेकर गए बाद में पन्ना आए  ।

सुनीता आदिवासी (परिजन)


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